"राजिम "/चम्पारण





छत्तीसगढ़ का प्रयाग कहे जाने वाली नगरी "राजिम "महानदी ,पैरी और सोंढूर नदी के संगम में बसा हुआ है |पौराणिक मान्यताओ के अनुसार राजिम को देवनगरी के नाम से जाना जाता था |इसे छत्तीसगढ़ की संस्कारधानी की भी उपमा दी गयी है |श्रद्धा ,विश्वास ,तर्पण ,स्नान आदि धार्मिक संस्कारो की गरिमा लिए यहाँ दूर दूर से जन आते है |

त्रिवेणी संगम में बसा भगवान राजीवलोचन का मंदिर छत्तीसगढ़ की प्रमुख्य मंदिरों में से एक है |राजीवलोचन अर्थात भगवान विष्णु जिनके कमल रूपी नैन में स्वयं प्रकृति समाई हुई है |चतुर्भुज भगवान महाविष्णु की श्यामवर्णीय मूर्ति जिनके हाथो में शंख ,गदा ,चक्र और पद्म सुशोभित हो रहे है |ऐसे भगवान को हमारा कोटि -कोटि नमन है |मंदिर के मुख्य द्वार पर तथा सामने का गोपुरम भव्य है |मंदिर के अन्दर दो शिलालेख है |जो चेदी संवत 896 अर्थात 1148 ईस्वी में लिखा गया है |जिसमे कलचुरी शासन के प्रमाण मिलते है |
त्रिवेणी  संगम के मध्य ही पंचमुखी कुलेश्वर महादेव  का मंदिर है| कहा जाता है भगवान राम ,सीता और लक्ष्मण के वनवास काल में वे यहा ठहरे थे इसी समय माता सीता ने बालू का शिवलिंग बना कर भगवान शिव की पूजा अर्चना की थी |श्री राजीवलोचन मंदिर को संसार का पांचवा धाम माना गया है |यहाँ फरवरी -मार्च माह के माघी पूर्णिमा के दिन मेला भरता है जो महाशिवरात्रि तक चलता है जो यहाँ के किसी बड़े महोत्सव से कम नहीं है |त्रिवेणी संगम के मध्य भगवान् भोले नाथ कुलेश्वर महादेव पंचमुखी रुद्राक्ष के रूप में स्थापित है जिसका मूल नाम उत्प्लेशवर  था जो बाद में कुलेश्वर हो गया |




















चम्पारण 







चम्पारण  रायपुर से दक्षिण पूर्व में स्थित वैष्ण्व सम्प्रदाय के प्रवर्तक वल्ल्भाचार्य की जन्म स्थली है कहा जाता है गर्भवती महिलाये इस क्षेत्र से नहीं गुजरती क्योकि यहाँ पहुचते ही गर्भपात हो जाता है कथाओ के अनुसार बल्ल्भाचार्य जी का जन्म गर्भपात से ही हुआ था जब इनके माता -पिता तीर्थ के लिए जा रहे थे |यहाँ बल्लभाचार्य  के अनुयायिओं ने उनकी स्मृति में एक भव्य मंदिर का निर्माण किया है|यहाँ पहुचते ही लगता है हैम भगवान् श्रीकृष्ण कि जन्म भूमि में पहुच गए है |वैष्णव संप्रदाय के कृष्ण भक्ति कि अनुपम छाप यहाँ देखने को मिलता है |यही जंगल के नजदीक चम्पकेश्वर महादेव का एक पुराना मंदिर भी है |मंदिर में स्थापित शिवलिंग तीन भागो में बटा दिखायी देता है कहा जाता है यह गणेश ,पार्वती और भगवान् शिव कोप्रदर्शित करते है |कविदांति है कि यहाँ लोग वृक्ष नहीं काटते न ही पत्ते तोड़ते है |क्योकि ऐसा करने से किसी अनहोनी कि आशंका होती है ऐसा यहाँ के लोगो का मानना है |रायपुर से राजिम व् रायपुर से आरंग मार्ग से यहाँ आसानी से पंहुचा जा सकता है |

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